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क्या है BIMSTEC, भारत को इससे कितना फायदा? जिसकी समिट में शामिल होने बैंकॉक पहुंचे PM मोदी

BIMSTEC शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक पहुंचे.BIMSTEC का पूरा नाम है- Bay of Bengal Initiative for multi-Sectoral Technical and Economic Cooperation. इस दो दिनी सम्मेलन में भारत के पड़ोसी देशों बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका, भूटान, म्यांमार शामिल हो रहे हैं. यह सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब म्यांमार और थाईलैंड भूकंप से हुई तबाही का सामना कर रहे हैं.

 

पीएम मोदी के पहुंचने के पहले ही भारत ने इन देशों की मदद को ऑपरेशन ब्रह्मा के माध्यम से मदद की पेशकश कर दी थी. भारतीय सैनिक जहाजों के माध्यम से हर तरह की मदद पहुंचाने में जुटे हुए हैं. संभव है कि जब सम्मेलन समाप्त हो तो सभी सदस्य देश म्यांमार और थाईलैंड के लिए अलग-अलग या सामूहिक रूप से मदद की पेशकश करें.

 

इस शिखर सम्मेलन के बहाने आइए जान लेते हैं कि इस संगठन की स्थापना क्यों हुई? कब हुई? इसके सदस्य देश कौन-कौन हैं? संगठन का मुख्य उद्देश्य क्या है? यह कैसे काम करता है? भारत के लिए यह कितना महत्वपूर्ण है और क्यों?

क्या है BIMSTEC, कितने देश हैं सदस्य?

BIMSTEC की स्थापना क्षेत्रीय सहयोग के इरादे से की गई थी. इसे 6 जून 1997 को बैंकॉक घोषणा के तहत स्थापित किया गया था. अभी इसके सदस्य देशों की संख्या सात है. इनमें पांच देश भारत, बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका, भूटान दक्षिण एशिया से तथा म्यांमार और थाईलैंड दक्षिण-पूर्व एशिया से हैं. शुरू में इसके सदस्य देशों में भारत, बांग्लादेश, श्रीलंका और थाईलैंड ही शामिल थे. तब इसका नाम बांग्लादेश, भारत, श्रीलंका, और थाईलैंड आर्थिक सहयोग (BIST-EC) था. फिर जब म्यांमार इससे जुड़ा तो संगठन का नाम बदलकर BIMST-EC कर दिया गया. साल 2004 में भूटान और नेपाल भी जुड़े तब इसका नाम Bay of Bengal Initiative for multi-Sectoral Technical and Economic Cooperation (BIMSTEC) हुआ.

 

क्या है संगठन का मुख्य उद्देश्य?

संगठन का मुख्य उद्देश्य बंगाल की खाड़ी से जुड़े देशों की आर्थिक तरक्की, आपसी सहयोग, क्षेत्रीय चुनौतियों से मिलकर निपटने की नीति, आपसी हितों पर विचार-विमर्श करना आदि था. सहयोग और समानता की भावना पैदा करने के साथ ही शिक्षा, विज्ञान-तकनीक के क्षेत्र में एक-दूसरे की खुलकर मदद करना भी इसके उद्देश्यों में शामिल है. समान संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता, राजनीतिक स्वतंत्रता, आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करना, शांतिपूर्ण श-अस्तित्व, पारस्परिक लाभ, सदस्य देशों के बीच अन्य द्विपक्षीय, क्षेत्रीय एवं बहुपक्षीय सहयोग जैसे मुद्दे भी इस महत्वपूर्ण संगठन के प्रमुख सिद्धांतों में शामिल किये गए हैं.

दुनिया के लिए क्यों महत्वपूर्ण है BIMSTEC?

सदस्य देशों के लिए तो यह संगठन महत्व रखता ही है, दुनिया के लिए भी यह बेहद महत्वपूर्ण है. मीडिया रिपोर्ट की मानें तो दुनिया की कुल आबादी का 22 फीसदी से ज्यादा हिस्सा इन्हीं सात देशों में निवास करता है. दुनिया के कुल व्यापार का एक चौथाई से ज्यादा हिस्सा बंगाल की खाड़ी से होकर गुजरता है. सदस्य देशों की संयुक्त जीडीपी लगभग 4 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर बताई जाती है.

ये आंकड़े यह बताने को काफी हैं कि दुनिया के लिए यह संगठन और इसके सदस्य देश कितने महत्वपूर्ण हैं. BIMSTEC की पहल पर कुछ महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर काम हुआ, जिसका सीधा लाभ सदस्य देशों को मिल रहा है. इनमें भारत और म्यांमार को जोड़ने वाली कलादान मल्टी मॉडल परियोजना, म्यांमार से होकर भारत और थाईलैंड को जोड़ने वाली एशियाई त्रिपक्षीय राजमार्ग तथा यात्री एवं माल परिवहन के सुगम प्रवाह हेतु बांग्लादेश-भारत-भूटान-नेपाल मोटर वाहन समझौता शामिल है.

बांग्लादेश में है इसका स्थायी सचिवालय

BIMSTEC का स्थायी सचिवालय बांग्लादेश की राजधानी ढाका में स्थापित की गई है. इसे साल 2014 में स्थापित किया गया. वरिष्ठ राजनयिक इंद्रमणि पाण्डेय इस समय इस महत्वपूर्ण संगठन के महासचिव है, जो भारत से हैं. भारत इस सचिवालय पर आने वाले व्यय का 32 फीसदी योगदान देता है.

Bimstec History

BIMSTEC का स्थायी सचिवालय बांग्लादेश की राजधानी ढाका में है. FILE PHOTO

भारत के लिए है BIMSTEC का खास महत्व

भारत के लिए इस संगठन का बहुत महत्व है. यह भारत की तीन प्रमुख नीतियों को आगे बढ़ाने का अवसर देता है. नेबरहुड फर्स्ट, एक्ट ईस्ट और भारत के पूर्वोत्तर राज्यों का आर्थिक विकास की योजना को यह संगठन पंख देता है. नेबरहुड फर्स्ट, भारत की वह नीति है जिसके तहत वह पड़ोसी देशों की आगे बढ़कर मदद करता है. एक्ट ईस्ट पॉलिसी के तहत भारत खुद को दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों से जोड़ता है. उनसे परस्पर सहयोग स्थापित करता है.

बंगाल की खाड़ी के आसपास के देशों में चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के विस्तार के प्रभाव से मुकाबला करने का अवसर देता है. भारत-पाकिस्तान के बीच कड़वाहट भरे रिश्तों की वजह से अब दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) अब महत्वहीन हो चला है. ऐसे में इस संगठन की भूमिका भारत के लिए और महत्वपूर्ण हो जाती है. आबादी के साथ ही सदस्य देशों में हर तरह से मजबूत भारत के लिए सदस्य देश हर तरह के अवसर लेकर आते हैं.

छठवां शिखर सम्मेलन थाईलैंड में

लगभग 28 वर्ष पुराने इस संगठन ने अब तक कुल छह शिखर सम्मेलन आयोजित किये हैं. छठवां शिखर सम्मेलन थाईलैंड में आज और कल यानी तीन-चार अप्रैल को आयोजित है. जबकि शुरू में तय हुआ था कि हर दो साल में एक शिखर सम्मेलन आयोजित किया जाएगा, जिसमें सदस्य देशों के प्रमुख शामिल होंगे. शिखर सम्मेलन इस संगठन का सर्वोच्च निकाय है. पांचवां शिखर सम्मेलन श्रीलंका में मार्च 2022 तथा चौथा शिखर सम्मेलन साल 2018 के अगस्त महीने में नेपाल की राजधानी काठमांडू में आयोजित किया गया था. हर साल विदेश मंत्री स्तरीय बैठकें भी आयोजित करने का प्रावधान है. इसी तरह विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अफसरों का सम्मेलन भी समय-समय पर आयोजित होता आ रहा है. कार्यकारी समूह की बैठकें हर महीने ढाका में आयोजित होती हैं. इसमें सदस्य देशों के राजदूत या उनके प्रतिनिधि शामिल होते आ रहे हैं. निजी क्षेत्र की भागीदारी सुनिश्चित करने के इरादे से आर्थिक मंच एवं व्यापार मंच के कार्यक्रम भी आयोजित किये जाने का प्रावधान है.

कौन तय करेगा अध्यक्षता, कैसे तय होता है?

पहला BIMSTEC व्यापार शिखर सम्मेलन बीते साल 6 से 8 अगस्त तक नई दिल्ली में आयोजित किया गया था. विदेश मंत्रालय ने इसमें सीआईआई की मदद ली थी. BIMSTEC की अध्यक्षता अल्फाबेटिकल ऑर्डर के हिसाब से देशों के पास आती है. अभी तक भारत के पास दो बार, बांग्लादेश दो बार, श्रीलंका दो बार, म्यांमार दो बार, नेपाल एक बार और थाईलैंड के पास एक बार अध्यक्षता रही है. अध्यक्षता का क्रम सामान्य दशा में दो साल में बदलता है.

चुनौतियां भी कम नहीं

अनेक अच्छी चीजों, फैसलों के बीच BIMSTEC के सम्मुख चुनौतियां भी कम नहीं हैं. उसे बहुत काम करना होगा. भारत को आगे बढ़ते हुए बड़े भाई की भूमिका अदा करणी होगी. यह संगठन कई बार आर्थिक संकट का भी सामना करता है. अगर सब कुछ तय एजेंडे के हिसाब से हो तो BIMSTEC अपने लक्ष्यों को सुलभ तरीके से पा सकता है. सभी देशों को समझना होगा कि वे पीक एंड चूज की पॉलिसी न अपनाएं. मुक्त व्यापार समझौते करते हुए एक-दूसरे की मदद को हाथ आगे बढ़ाएं. बांग्लादेश, म्यांमार जैसे देश आंतरिक समस्याओं से जूझ रहे हैं लेकिन BIMSTEC मौन है. उसे आगे आना होगा.

 

 

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