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थाईलैंड में आज जिन 6 देशों के साथ वार्ता करेंगे पीएम मोदी उनसे भारत के कैसे संबंध?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी थाईलैंड की यात्रा पर हैं. दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के देश थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में बिम्सटेक शिखर सम्मेलन के लिए इकठ्ठा हो रहे हैं. आर्थिक साझेदारी को बढ़ावा देने के लिए बनी बंगाल की खाड़ी से लगे देशों के इस मंच -बिम्सटेक के सदस्य देशों की अगर बात की जाए तो भारत के अलावा बांग्लादेश, भूटान, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड इसका हिस्सा हैं.

 

आखिरी दफा बिम्सटेक शिखर सम्मेलन काठमांडू में आयोजित हुआ था. कोविड के बाद भी सम्मिट श्रीलंका में आयोजित हुआ पर ये वर्चुअल था. ये छठा सम्मिट है. सम्मेलन में शामिल होने के अलावा प्रधानमंत्री मोदी थाईलैंड के पीएम शिनावात्रा से मुलाकात कर सकते हैं. साथ ही, 4 से 6 अप्रैल तक श्रीलंका की राजकीय यात्रा पर होंगे. आइये जानें कि बिम्सटेक के सदस्य देशों से भारत के संबंध कैसे हैं.

बांग्लादेश – अगस्त 2024 में शेख हसीना का तख्ता उलटने के बाद ही से भारत और बांग्लादेश के संबंध काफी हिचकोले भरे रहे हैं. शेख हसीना के भारत से अच्छे संबंध थे. पर बांग्लादेश में उनके खिलाफ मुखर होती आवाज और नई दिल्ली से उनकी निकटता अंततः भारत और बांग्लादेश संबंधों पर हावी हो गई. हाल ही में, बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस की चीन यात्रा और पाकिस्तान से बढ़ती निकटता ने भी भारत-बांग्लादेश संबंधों को असहज किया है.

 

नेपाल – भारत और नेपाल के बीच ऐतिहासिक तौर पर दोस्ती और गहरे सांस्कृतिक संबंध रहे हैं. अक्सर इसे ‘रोटी-बेटी’ का रिश्ता कहकर भी संबोधित किया जाता है. भारत-नेपाल की सीमा आज भी खुली है जहां बिना किसी रोक-टोक के आवाजाही होती है. इससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक, सांस्कृतिक और आर्थिक लेनदेन होता है. पर केपी शर्मा ओली के प्रधानमंत्री बनने के बाद रिश्ते उस कदर गर्मजोशी से भरे नहीं रहे हैं, जैसे पहले थे. ओली प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली यात्रा पर नई दिल्ली के बजाय बीजिंग गए, जिसे परंपराओं को तोड़ने वाला माना गया.

भूटान – भारत और भूटान के बीच राजनयिक संबंधों की नींव साल 1968 में पड़ी. इसे फरवरी 2007 में नए सिरे से देखा-परखा गया. भारत भूटान के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक रहा है. भूटान के कुल आयात-निर्यात का करीब 80 फीसदी हिस्सा भारत से होकर जाता है. जो ये दिखाता है कि दोनों देशों के संबंध कितने गर्मजोशी से भरे हैं. अभी पिछले ही हफ्ते भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे भारत की यात्रा पर थे. जहां प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात के दौरान दोनों देशों के बीच संबंध को नए पायदान पर ले जाने को लेकर कई सहमतियां बनी.

म्यांमार – भारत-म्यांमार सांस्कृतिक और धार्मिक संबंधों की सदियों पुरानी मित्रता के गवाह हैं. भारत एक्ट ईस्ट पॉलिसी के तहत म्यांमार को अपना एक अहम साझेदार के तौर पर देखता है. म्यांमार ही के रास्ते भारत दक्षिण-पूर्व एशिया में अपनी दखल बढ़ाने का हिमायती भी रहा है. दोनों देश करीब 1 हजार 600 किलोमीटर की सीमा साझा करते हैं. साथ ही, अभी भूंकप आने के बाद भी भारत ने जिस तेजी के साथ मदद का हाथ बढ़ाया. उसे पड़ोसी देशों ने काफी अच्छी निगाह से देखा.

थाईलैंड – भारत और थाईलैंड सभ्यता, संस्कृति और धार्मिक जुड़ाव साझा करते हैं. भारत म्यांमार ही की तरह थाईलैंड को भी एक्ट ईस्ट पॉलिसी का महत्त्वपूर्ण साझेदार मानता है. दोनों देशों के बीच साल 2019 में द्विपक्षीय व्यापार करीब 12 बिलियन डॉलर था. जो अगले साल 2020 में कोविड के बावजूद भी 10 बिलियन डॉलर के करीब बना रहा. थाईलैंड भारत को सिंगापुर, वियतनाम, इंडोनेशिया और मलेशिया के बाद पांचवा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार मानता है. जो चीन के बजाय भारत को तरजीह देने की एक मिसाल है.

श्रीलंका – भारत और श्रीलंका भी सदियों पुराना सांस्कृतिक जुड़ाव साझा करते हैं. दोनों देशों के बीच आर्थिक, रणनीतिक रिश्ते काफी मजबूत रहे हैं. आर्थिक तंगहाली से जूझ रहे श्रीलंका को भारत ने काफी मदद भी किया था. प्रधानमंत्री मोदी थाईलैंड की यात्रा के बाद दो दिनों की राजकीय यात्रा पर श्रीलंका भी जा रहे हैं. श्रीलंका में राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके के राष्ट्रपति बनने के बाद दोनों देशों के बीच संबंध और बेहतर ही हुए हैं. मुमकिन है कि मोदी की इस यात्रा के बाद भी चीजें और बेहतर हों.

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